धान खरीदी संकट: छत्तीसगढ़ में ₹3358 मूल्य और किसानों को ₹6000 करोड़ की अग्रिम राशि देने की पैरवी...

रायपुर ।  छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सत्र को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने राज्य सरकार की धान खरीदी नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए किसानों को तुरंत राहत देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि विष्णुदेव साय सरकार को दीपावली पर्व से पहले राज्य के किसानों के खातों में 6 हजार करोड़ रुपये की राशि स्थानांतरित करनी चाहिए, ताकि त्यौहार के समय उन्हें आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े.

प्रति क्विंटल 3358 रुपये देने का गणित, आदान सहायता में कटौती का आरोप

दीपक बैज के अनुसार, भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा चुनावों में 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का वादा किया था. हालांकि, बीते वर्षों में केंद्र सरकार द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में लगातार वृद्धि की गई है. उन्होंने स्पष्ट किया कि 3100 रुपये के मूल वादे में पिछले तीन सालों की कुल MSP वृद्धि (258 रुपये) को जोड़कर किसानों को 3358 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जाना चाहिए. कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार प्रति एकड़ के हिसाब से गणना का नया नियम लाकर किसानों के साथ वादाखिलाफी कर रही है. आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2023-24 में जब MSP 2183 रुपये थी, तब राज्य सरकार 917 रुपये प्रति क्विंटल आदान सहायता देती थी. लेकिन जैसे-जैसे MSP बढ़ती गई, राज्य सरकार का अंश घटता गया और वर्ष 2026-27 में MSP 2441 रुपये होने पर यह सहायता मात्र 659 रुपये रह गई है. बैज का कहना है कि प्रति क्विंटल 258 रुपये की यह कटौती प्रति एकड़ (21 क्विंटल के हिसाब से) 5418 रुपये का सीधा नुकसान पहुंचा रही है.

पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के मॉडल से तुलना

विपक्ष ने आरोप लगाया कि रकबा समर्पण और गिरदावरी में कटौती के नाम पर किसानों की वास्तविक उपज को कम आंका जा रहा है. बैज ने कहा कि वर्ष 2018-19 में जब MSP 1750 रुपये थी, तब तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने किसानों को 2500 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया था. इसी तरह 2023-24 में MSP बढ़ने पर 2640 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीदी की गई थी. ऐसे में सरकार को टुकड़ों में या गणना बदलकर देने के बजाय एकमुश्त उचित मूल्य देना चाहिए.

कवर्धा के वनांचल में बैगा आदिवासियों की स्थिति पर उठाए सवाल

धान के मुद्दे के अलावा, प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व ने राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था और विशेष संरक्षित जनजाति बैगा की स्थिति पर चिंता व्यक्त की. कवर्धा जिले के रेंगाखार क्षेत्र स्थित ग्राम नंदनी कुमान का दौरा करने के बाद बैज ने बताया कि इलाके में कुपोषण, एनीमिया और मलेरिया के कारण बैगा समुदाय के 5 बच्चों की असमय मृत्यु हुई है. कई बच्चे अब भी बोडला उपस्वास्थ्य केंद्र में भर्ती हैं तथा अनेक बीमार बच्चे गांव में ही उचित इलाज के अभाव में मौजूद हैं.

पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे और एनआरसी केंद्र की मांग

उपमुख्यमंत्री के गृह निर्वाचन क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के इस स्तर पर दुख जताते हुए विपक्ष ने आरोप लगाया कि क्षेत्र में स्वच्छ पेयजल, टीकाकरण और मेडिकेटेड मच्छरदानियों का अभाव है. उन्होंने कहा कि सुपोषण और स्वास्थ्य से जुड़ी योजनाएं केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गई हैं.

कांग्रेस ने मांग रखी है कि:

कुपोषण से जान गंवाने वाले बैगा बच्चों के परिजनों को 10 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए. प्रभावित गांव में ही तुरंत कुपोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) स्थापित कर बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था की जाए.

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