
क्रन्तिकारी संकेत न्यूज़
छत्तीसगढ़ के नए विधानसभा बिल्डिंग में बजट सत्र 2026-27 शुरू हो चुका है. वित्तमंत्री ओपी चौधरी अपना तीसरा बजट पेश करने जा रहे हैं. पहले दिन राज्यपाल डेका का अभिभाषण हुआ, जिसके बाद वित्त मंत्री ने आर्थिक सर्वेक्षण पेश किया. प्रदेश की जनता को इंतजार है कि 24 फरवरी को साय सरकार के पिटारे से किसे क्या मिलने वाला है. लेकिन हम आपको छत्तीसगढ़ के बजट से जुड़े कुछ रोचक जानकारी के बारे में बताने जा रहे हैं.
किसने कितनी बार पेश किया? एक वित्त मंत्री को गवानी पड़ी थी कुर्सी
सबसे पहली बार रामचंद्र सिंहदेव ने बतौर वित्त मंत्री छत्तीसगढ़ का बजट पेश किया था. उन्होंने साल 2001 में पहली बार पेश किया. उन्होंने अपने कार्यकाल में तीन बार बजट पेश किया. इसके बाद अमर अग्रवाल ने भी तीन बार बजट पेश किया, लेकिन बगवात के चलते उन्हें अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी. फिर वित्त विभाग तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह ने अपने पास ही रखा था. 15 साल के सत्ता परिवर्तन के बाद भूपेश बघेल ने भी मुख्यमंत्री बनने के बाद वित्त मंत्रालय अपने पास रखा.
राममचंद्र सिंहदेव ने पेश किया था छत्तीसगढ़ का पहला बजट
मुख्यमंत्री अजीत जोगी के कार्यकाल में राममचंद्र सिंहदेव ने बजट पेश किया था. सिंहदेव कोरिया राजघराने से तालुक रखते थे.
राममचंद्र ने 3 बार छत्तीसगढ़ का बजट किया पेश
राममचंद्र सिंहदेव ने 2001-02 में कुल 7 हजार 294 करोड़ रुपए का बजट पेश किया था.
2002-03 तक में 8 हजार 471 करोड़ के आम बजट के साथ एक अनुपूरक बजट पेश किया था.
2003-04 तक में 9 हजार 978 करोड़ रुपए का बजट पेश किया गया. इसके अलावा दो अनुपूरक बजट भी पेश किया गया था.
2003 में भाजपा सत्ता में आई, अमर अग्रवाल बने वित्त मंत्री
भाजपा सरकार बनने के बाद अमर अग्रवाल को वित्त विभाग की कमान सौंपी गई. वे प्रदेश के दूसरे वित्त मंत्री रहे और उन्हें तीन वर्षों तक बजट पेश करने का अवसर मिला. अमर अग्रवाल की पहचान एक मितव्ययी वित्त मंत्री के रूप में रही. वर्ष 2006 में उन्होंने वित्त विभाग का प्रभार छोड़ दिया.
अमर अग्रवाल ने भी 3 बजट किया पेश
2004-05 में अमर अग्रवाल ने 10,555 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें दो अनुपूरक बजट शामिल थे.
2005-06 में उन्होंने 11,242 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया, जिसके साथ तीन अनुपूरक बजट लाए गए.
2006-07 में अमर अग्रवाल ने 13,185 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें तीन अनुपूरक प्रावधान जोड़े गए.
रमन सिंह ने नहीं छोड़ा वित्त मंत्रालय
2006 में उनके वित्त विभाग छोड़ने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने यह जिम्मेदारी अपने पास ले ली.
2007 में डॉ. रमन सिंह ने अपने कार्यकाल का पहला बजट पेश किया.
2007 से 2018 तक उन्होंने वित्त विभाग अपने पास ही रखा और हर वर्ष मुख्यमंत्री के रूप में स्वयं बजट प्रस्तुत करते रहे.
इस दौरान डॉ. रमन सिंह ने कुल 12 बार बजट पेश किया.
अपने कार्यकाल के अंतिम वर्ष 2018-19 में उन्होंने मुख्य बजट के साथ दो अनुपूरक बजट भी पेश किए.
2007 से 2018 तक लगातार बढ़ता रहा बजट आकार
2007-08 में 16,473 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट शामिल थे.
2008-09 में 19,392 करोड़ रुपये का बजट आया, जिसमें दो अनुपूरक प्रावधान थे.
2009-10 में 23,482 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया, जिसमें दो अनुपूरक बजट शामिल रहे.
2010-11 में 26,099 करोड़ रुपये का बजट पेश हुआ, जिसके साथ तीन अनुपूरक बजट लाए गए.
2011-12 में 32,477 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया, जिसमें तीन अनुपूरक प्रावधान थे.
2012-13 में 39,677 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट शामिल थे.
2013-14 में 44,169 करोड़ रुपये का बजट आया, जिसके साथ तीन अनुपूरक बजट जोड़े गए.
2014-15 में 54,710 करोड़ रुपये का बजट पेश हुआ, जिसमें तीन अनुपूरक बजट भी शामिल थे.
2015-16 में 65,013 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया गया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट थे.
2016-17 में 76,032 करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट शामिल रहे.
2017-18 में 88,599 करोड़ रुपये का बजट आया, जिसमें चार अनुपूरक बजट जोड़े गए.
15 साल बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस का बजट
कांग्रेस 15 वर्ष बाद सत्ता में वापस आई. पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की तरह ही भूपेश बघेल ने भी वित्त विभाग अपने पास रखा.
2018-19 में अनुपूरक बजट वित्त मंत्री के रूप में भूपेश बघेल ने पेश किया.
2018-19 में भूपेश बघेल ने 1,50,170 करोड़ रुपये का बजट पेश किया, जिसमें तीन अनुपूरक बजट शामिल थे.
2019-20 का मुख्य बजट और एक अनुपूरक बजट भी उन्होंने ही प्रस्तुत किया.
2020-21 में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बतौर वित्त मंत्री अपना दूसरा बजट पेश किया.
2021-22 में 97,106 हजार करोड़ का पेश किया गया.
2022-23 में
2023 में फिर से सत्ता बदली और वित्त विभाग की जिम्मेदारी पहली बार जीतकर आए पूर्व आईएएस ओपी चौधरी को दी गई. पहले उन्होंने GYAN पर आधारित बजट पेश किया. इसके बाद उन्होंने GATI पर आधारित बजट प्रस्तुत किया. इस बार वे अपना तीसरा बजट 24 फरवरी को प्रस्तुत करेंगे.





