
क्रन्तिकारी संकेत न्यूज़
रायगढ़।
नव निर्माण संकल्प समिति एवं संस्कार पब्लिक स्कूल के संयुक्त तत्वावधान में रायगढ़ के प्रसिद्ध समाजसेवि शिक्षाविद रामचंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में 8 मार्च अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर नारी शक्ति सम्मान समारोह का भव्य आयोजन किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर रायगढ़ में महिलाओं के योगदान और उनकी सामाजिक जिम्मेदारियों को सम्मानित करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध शैक्षणिक संस्थान संस्कार पब्लिक स्कूल के ऑडिटोरियम में महिला समाज की बुनियाद” विषय पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
यह कार्यक्रम नव निर्माण संकल्प समिति और संस्कार पब्लिक स्कूल के प्रमुख तथा रायगढ़ के प्रतिभाओं को सम्मानित करने वाले रामचंद्र शर्मा के मार्गदर्शन में एक संयुक्त कार्यक्रम का आयोजित हुआ। जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य कर रही 100 से अधिक महिलाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के आयोजक रामचंद्र शर्मा ने सामाजिक, राजनीतिक, प्रशासनिक तथा विभिन्न प्रोफेशनल क्षेत्रों में सक्रिय महिलाओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। इस अवसर पर राम चन्द्र शर्मा ने कहा कि महिलाएं केवल परिवार ही नहीं बल्कि पूरे समाज की मजबूत नींव हैं। उनके योगदान, त्याग और नेतृत्व क्षमता से ही समाज में संतुलन, संवेदना और प्रगति संभव हो पाती है।

समारोह में रायगढ़ की सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, पुलिस, प्रेस, साहित्य और वकालत एवं विभिन्न क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं को मंच पर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं की समानता, सम्मान और सशक्तिकरण के संदेश को मजबूत करना था। चाहे शिक्षा हो, प्रशासन हो या समाज सेवा—महिलाओं ने अपनी क्षमता और समर्पण से यह साबित किया है कि समाज के विकास की असली ताकत महिला शक्ति ही है। इस गरिमामय आयोजन ने यह संदेश दिया कि महिलाएं केवल घर की जिम्मेदारी नहीं निभातीं, बल्कि समाज के निर्माण और भविष्य की दिशा तय करने में भी उनकी भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।
कार्यक्रम के अंत में सभी सम्मानित महिलाओं को स्मृति चिन्ह देकर उनके कार्यों के प्रति समाज की कृतज्ञता व्यक्त की गई।





कार्यक्रम में डॉ.रुक्मणी सिंह राजपूत, श्रीमती आशा त्रिपाठी, किरण मिश्रा, तुलसी देवी साहू, कमला साहू, सरला साहा, डॉ माधुरी त्रिपाठी, डॉ मनीषा त्रिपाठी, डॉ आर एम शर्मा, मंजूलता नायक, रंजना गुप्ता, गुलापी सिदार, रानी चौहान, अरुणा चौहान, बीनू बेगम, बरखा सिंह, अरुणा मेश्राम, पिंकी शर्मा, गौरी पटेल, पूनम सोलंकी, सरिता साहू, संजुक्ता सिंह, गीता उपाध्याय, डॉ जया साहू, हेमा भट्ट, त्रिवेणी डहरे, दुर्गा देवांगन, नेहा देवांगन, वंदना केसरवानी, सपना सिदार, भावना शर्मा, मोनिका इजारदार, रीना पटेल, मनीषा बाजपाई, वर्षा तंबोली, जस्सी फिलिप, सुशीला साहू, रेशमा पंडा, नेहा शर्मा, सिमरन पांगरे, शर्मिला नायक, मीना पटेल, विजयश्री सिंह, अंजू बंसल, अनिता कपूर, आरती तिवारी, रीता श्रीवास्तव, मोहिनी साहू, ज्योति जाटवर, सुरजीत कौर, विनाया कारमरे, रेखा शर्मा, रेनू अग्रवाल, मंजू जोशी, पिंकी गोयल, रितिका बेरीवाल, मनीषा अग्रवाल, विभा शर्मा, गायत्री ठाकुर, बीना शर्मा, शीला तांडी, श्वेता शर्मा, सुनिता खरे, चैताली रॉय, काजल, डॉ काकोली पटनायक, अलका अग्रवाल, आरती सिंह, संजना शुक्ला, रानू घोष, पुष्पा चौहान, गीता नायक, रीचा बजाज, गीता भारद्वाज, रंजना कमल पटेल, रिंकी पांडेय, स्वाति पंड्या, धनेश्वरी धरा देवांगन, स्मिता, साइना मलिक, आशा बेरीवाल, संतोष शर्मा, पुष्पलता शर्मा, सुनीता मुकेश शर्मा, तोषी शर्मा सहित समाज के अलग-अलग क्षेत्र में योगदान देने वाली अन्य महिलाएं उपस्थित रही।
प्रतिभा और परिश्रम से नई ऊंचाइयों को छू रही है महिलाएं: आशा त्रिपाठी

अपने संबोधन में देश के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने वाली शहिद करनाल विप्लव त्रिपाठी की माता एवं समाजसेविका श्रीमती आशा त्रिपाठी कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और परिश्रम से नई ऊंचाइयों को छू रही है। महिलाओं को सम्मान देना केवल एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि समाज की स्थायी सोच बननी चाहिए। महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व से ही एक समान, संवेदनशील और विकसित समाज की कल्पना साकार हो सकती है।


साहित्य, राजनीति और सेवा के क्षेत्र की अग्रणी महिलाओं ने दिया प्रेरक संदेश
🔹साहित्यकार :- सुशीला साहू ने कहा कि समाज में संवेदनशीलता और जागरूकता लाने में साहित्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। महिलाओं की रचनात्मकता और विचार समाज को नई दिशा देने का कार्य कर रहे हैं।
🔹 पॉलीटिशियन:- पूनम सोलंकी ने अपने संबोधन में कहा कि महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी बढ़ना लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। महिलाओं के सशक्त होने से समाज में समानता और न्याय की भावना मजबूत होती है।
🔹 डॉक्टर:- जय साहू ने कहा कि महिलाओं की सेवा भावना और जिम्मेदारी समाज के स्वास्थ्य और विकास की आधारशिला है। उन्होंने महिला सशक्तिकरण को समाज की प्रगति से जोड़ा।
🔹 साहित्यकार :- गीता उपाध्याय ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परचम लहरा रही है। महिलाओं को शिक्षा और अवसर मिलने से समाज का समग्र विकास संभव है।





