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मीनाबाजार में लाखों की टैक्स चोरी, संचालकों पर मेहरबान हैं जीएसटी के अधिकारी

शिकायत पर दिखावे के लिए पहुंचे अधिकारी टैक्स वसूलने की बजाय लीपापोती में जुटे, नोटिस थमाकर लौट गए जिम्मेदार

क्रांतिकारी संकेत
रायगढ़।
 जन्माष्टमी मेले पर रायगढ़ में लगा मीनाबाजार लगातार सुर्खियों में है। खराब झूले के कारण दर्जनों लोगों की जान सासंत में डालने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की, इसी बीच जीएसटी विभाग ने भी लाखों की टैक्स चोरी पर पर्दा डालने के लिए छापेमारी का नाटक किया और बिना कोई अग्रिम टैक्स वसूले केवल नोटिस थमा कर रस्म अदायगी कर दी।

मीना बाजार में 110 से ज्यादा स्टाल लगे हुए हैं जिन्हें नियमत: जीएसटी नंबर लेना चाहिए था लेकिन किसी भी दुकानदार ने टैक्स पटाने का कोई प्रयास नहीं किया। जबकि ऐसे छापेमारी के दौरान विभाग द्वारा आन स्पॉट टैक्स एवं पेनाल्टी वसूल की जाती है। रायगढ़ की प्रतिष्ठित फर्मों में भी इसी प्रकार जीएसटी विभाग टैक्स वसूलता रहा है। मीनाबाजार के मामले में उसका रवैया बिल्कुल अलग है। बाहर से आए प्रवासी व्यक्ति के टैक्स चोरी करने के बाद भी विभाग की दयानतदारी ने जीएसटी अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जीएसटी विभाग ईमानदारी से कार्यवाही करे तो तीनों मीना बाजार में करोड़ों की टैक्स चोरी पकड़ी जा सकती है परन्तु सारी इन्फॉर्मेशन होने के बाद भी जीएसटी अधिकारी कार्रवाई करने की बजाय मामले की लीपापोती करने में लगे हुए हैं। 

चार करोड़ के कारोबार का अनुमान, टैक्स 60 लाख से ज्यादा
जीएसटी अधिकारी यह जानते हैं कि मीनाबाजार में प्रवेश शुल्क के नाम पर प्रति व्यक्ति पचास रूपये वसूले जा रहे हैं और जन्माष्टमी के दौरान पांच लाख से भी अधिक लोगों ने मीनाबाजार देखा है। इस तरह महज प्रवेश शुल्क के रूप में ही अढ़ाई करोड़ रुपए की आवक हुई है। इसके अलावा झूलों में 100 रुपए प्रति व्यक्ति चार्ज लिया गया। यदि एक लाख लोगों ने भी झूला झूले तो एक करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई। अब 110 स्टालों की बात करे तो प्रति स्टाल एक लाख के किराए के हिसाब से एक करोड़ 10 लाख रुपए की आय हुई। इस तरह साढ़े चार करोड़ के अनुमानित राजस्व पर 60 लाख से भी ज्यादा का टैक्स बनता है।

स्थल किराया के रूप में भी भू-स्वामियों को मिले लाखों रुपए
मीनाबाजार लगाने के लिए प्रति स्थल के हिसाब से भू स्वामियों को 60 से 40 लाख तक दिए गए। इस प्रकार डेढ़ करोड़ रुपए तो सिर्फ स्थान का किराया दिया गया है। इस पर भी जीएसटी की वसूली की जानी चाहिए थी। अधिकारियों ने ऐसा कुछ नहीं किया। यहां तक कि उन्होंने छापेमारी में शिकायत कर्ता को साथ ले जाना तक उचित नहीं समझा। करोड़ों की टेक्स चोरी का यह खेल हर साल चलता है जीएसटी विभाग की कार्यवाही पारदर्शिता के मामले में हमेशा संदेहास्पद रही है। हर साल वो नोटिस नोटिस का खेल खेलता है और मीनाबाजार के जाने के बाद लकीर पीटता रहा जाता है। देखा जाए तो मीना बाजार के मामले में जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम और जीएसटी विभाग का रवैया पूरी तरह भ्रष्ट्राचार की भेंट चढ़ा हुआ है।

Mentor Ramchandra (Youtube)

Mentor Ramchandra (Youtube)

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