
शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पहुंचे रामलीला मैदान, पर यहां रोक दिया गया हड़ताली कर्मचारियों को
क्रांतिकारी संकेत
रायगढ़। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत स्वास्थ्य कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल के चौथे दिन गुरुवार को प्रतीकात्मक काले परिधान और चिन्ह के साथ विशाल रैली निकाली, लेकिन वे जिला भाजपा कार्यालय व रायगढ़ विधायक निवास तक नहीं पहुंच पाए। इसके लिए प्रशासन से उन्हें अनुमति नहीं मिली। हड़ताली कर्मचारियों को रामलीला मैदान में ही गेट बंद कर रोक दिया गया।
अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेश भर के 16,000 एनएचएम कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चल रहे हैं। इसमें रायगढ़ जिले के 550 से अधिक स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। अपनी मांगों के समर्थन में वे शहीद कर्नल विप्लव त्रिपाठी मिनी स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे हैं, जहां ‘हमारी भूल-कमल का फूल’ जैसे नारे के साथ सरकार की वादाखिलाफी पर करारा तंज कस रहे हैं। हड़ताल के दूसरे दिन हड़ताली कर्मचारियों ने सद्बुद्धि यज्ञ कर विरोध जताया। तीसरे दिन संविदा का पुतला दहन किया। जबकि चौथे दिन गुरुवार को रैली निकालकर भाजपा जिलाध्यक्ष व विधायक निवास पहुंचकर उन्हें ज्ञापन सौंपा जाना था, लेकिन कर्मचारियों को रामलीला मैदान में ही रोक लिया गया। इस पर एनएच कर्मचारियों ने नाराजगी जाहिर की और जमकर नारेबाजी की।
एनएचएम कर्मचारी संघ की जिला अध्यक्ष शकुंतला एक्का ने चेतावनी दी, ‘यदि सरकार जल्द ठोस कदम नहीं उठाती है और आंदोलन दबाने की कोशिश करते है, तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री और वित्त मंत्री ने वादा किया था कि सत्ता में आने पर 100 दिनों में नियमितीकरण के लिए कमेटी बनेगी। लेकिन 20 महीने और 160 से अधिक ज्ञापन बाद भी कोई कदम नहीं उठाया गया।
हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं हो रहीं प्रभावित
उन्होंने बताया कि हड़ताल से प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाएं ठप हैं। ओपीडी, इमरजेंसी, संस्थागत प्रसव, नवजात शिशु वार्ड, पोषण आहार केंद्र, रूटीन टीकाकरण, टीबी, मलेरिया, कुष्ठ रोग की जांच और दवाइयां, शुगर-ब्लड टेस्ट, ट्रूनाट, सीबीनाट, बलगम टेस्ट, नेत्र जांच, स्कूल और आंगनबाड़ी स्वास्थ्य परीक्षण, और ऑनलाइन डेटा एंट्री पूरी तरह बंद हैं। कई ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य केंद्रों में तालाबंदी है, जिससे मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
‘कोरोना योद्धाओं को रैली तक की इजाजत नहीं
संघ के पदाधिकारियों ने प्रशासन से सवाल किया कि पूर्व सूचना के बावजूद रैली की अनुमति न देकर, रामलीला मैदान का गेट बंद कर कर्मचारियों को कैद करने का यह कदम किसके आदेश पर हुआ? क्या सरकार उन कोरोना योद्धाओं को अपमानित करने पर तुली है, जिन्होंने महामारी में जान जोखिम में डालकर प्रदेश की सेवा की? आज प्रतीकात्मक काले परिधान और चिन्ह के साथ विशाल रैली निकाली गई, लेकिन जिला भाजपा कार्यालय, महात्मा गांधी को माल्यार्पण, और विधायक निवास तक ज्ञापन देने की अनुमति न देकर क्या प्रशासन लोकतंत्र का गला घोंट रहा है?
ये हैं एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगें
एनएचएम कर्मचारियों की 10 सूत्रीय मांगों में संविलियन/स्थायीकरण, पब्लिक हेल्थ कैडर की स्थापना, ग्रेड-पे का निर्धारण, कार्य मूल्यांकन में पारदर्शिता, लंबित 27 प्रतिशत वेतन वृद्धि देने, नियमित भर्ती में सीट आरक्षण, अनुकम्पा नियुक्ति, मेडिकल और अन्य अवकाश, स्थानांतरण नीति बनाने सहित 10 लाख कैशलेस चिकित्सा बीमा कराना शामिल हैं। संघ ने सरकार से तत्काल वार्ता और लिखित आश्वासन की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि यदि मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और तेज होगा। स्वास्थ्य सेवाओं पर पडऩे वाले प्रभाव की जिम्मेदारी पूरी तरह शासन की होगी।





