
क्रांन्तिकारी न्यूज़
छत्तीसगढ़ कांग्रेस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री कवासी लखमा ओडिशा के मलकानगिरी जिले में रहने के लिए चले गए हैं। मलकानगिरी जिले में रिक्लेमेशन कॉलोनी में छत्तीसगढ़ के पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा का अस्थायी निवास बन गई है। कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने छत्तीसगढ़ को छोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें शराब घोटाले के दो कथित मामलों के सिलसिले में राज्य से बाहर रहने का निर्देश दिए थे। जेल से रिहाई के बाद अब वह मलकानगिरी में रहेंगे।
पांच बार के विधायक हैं
कोर्ट ने बस्तर के कोंटा विधानसभा सीट क्षेत्र से पांच बार के आदिवासी विधायक कवासी लखमा को जमानत देते हुए उन्हें जांच लंबित रहने के दौरान छत्तीसगढ़ से बाहर रहने का निर्देश दिया है। मलकानगिरी में पहुंचने पर कोंटा विधायक का कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। कांग्रेस नेता श्रीनिवास राव ने बताया कि रिक्लेमेशन कॉलोनी में उनके लिए एक मकान किराये पर लिया गया है।
कवासी लखमा ने मलकानगिरी को रहने के लिए क्यों चुना इस सवाल के जवाब ने उन्होंने कहा कि- “सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार, मैंने उस अवधि के दौरान रहने के लिए मलकानगिरी को चुना है क्योंकि यहां की भाषा, परंपरा, संस्कृति और भोजन छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र से मिलते-जुलते हैं।”
मंगलवार को मिली थी जमानत
मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य पुलिस द्वारा अलग-अलग दर्ज किए गए शराब घोटाले के दो मामलों में कवासी लखमा को अंतरिम जमानत दी थी। कवासी लखमा को ईडी ने 15 जनवरी, 2025 को गिरफ्तार किया था और तब से वे न्यायिक हिरासत में थे। कांग्रेस नेता को चार फरवरी को रायपुर केंद्रीय जेल से रिहा किया गया था।
शराब घोटाले के समय थे आबकारी मंत्री
छत्तीसगढ़ में 2018 में कांग्रेस की सरकार बनी थी। भूपेश बघेल राज्य के मुख्यमंत्री थे। वहीं, कवासी लखमा को राज्य का आबकारी विभाग का मंत्री बनाया गया था। कवासी लखमा जिस समय मंत्री थे उसी दौरान राज्य में शराब घोटाला सामने आया था। शराब घोटाले की जांच ईडी कर रही है।





