
केलो, मांड व कुरकुट नदी का सीना चीर-चीर कर अपनी तिजोरी भर रहे रेत माफिया
जिले में एकमात्र रेत घाट स्वीकृत, लेकिन माफियाओं ने बना लिए अवैध रूप से कई घाट
क्रांतिकारी संकेत
रायगढ़। जिले में एकमात्र रेत खदान की विधिवत् अनुमति मिली हुई है, लेकिन रेत माफिया बंद घाटों से बदस्तूर रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन कर रहे हैं। सुबकुछ जानते हुए संबंधित विभाग व प्रशासन इस ओर आंखें बंद किया हुआ है। नतीजतन, घाटों में सुबह से लेकर रात तक ट्रैक्टर व हाईवा से रेत का खनन व परिवहन अवैध रूप से चल रहा है। जिले के केलो नदी, मांड नदी का सीना चीर-चीरकर रेत माफिया अपनी तिजोरी भरने में लगे हुए हैं। नदी के आसपास के गांवों के लोग इनकी करतूत से खासे परेशान हैं। गांव की सडक़ को तो ये बर्बाद कर ही रहे हैं, आए दिन दुर्घटनाएं भी हो रही हैं। उसके बाद भी प्रशासन का रवैया उदासीन बना हुआ है।
देश में केरल के साथ छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में भी मानसून ने दस्तक दे दी है। पूरे प्रदेश में प्री मानसून की बौछारें पड़ रही हंै। बारिश का मौसम नजदीक देख रेत माफिया भी सक्रिय हो गए हैं। वैसे तो उनका अवैध कारोबार बारहों महीने चलता है, लेकिन बारिश की पूर्व ये और भी अधिक सक्रिय हो जाते हैं। नदी में पानी आने से पहले ही ये लोग जगह-जगह रेत का पहाड़ खड़ा कर देते हैं और फिर इसी रेत को बारिश के दिनों में मनमाने दाम पर बेचते हैं। जिले में केलो नदी, मांड नदी, कुरकुट नदी पर पूर्व में कई घाटों की नीलामी की जाती थी, जहां से लोग रायल्टी देकर रेत ले जाते थे। वर्तमान में भी विधिवत् रूप से जिले में एकमात्र रेत घाट ही स्वीकृत है, जो शहर सहित पूरे अंचल में चल रहे निजी व सरकारी निर्माण कार्यों के लिए अपर्याप्त है। यही कारण है कि रेत माफिया नदी में जगह-जगह से अवैध उत्खनन कर उसे महंगे दामों में बेच रहे हैं। दिन हो या रात हो किसी भी समय इन अवैध घाटों पर उत्खनन व परिवहन के लिए वाहनों की लाइन लगी रहती है। इससे नदी को नुकसान तो हो रही है, बाढ़ का भी खतरा बना रहता है। इसकी शिकायत के बाद भी अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इस संबंध में खनिज विभाग व प्रशासन के अधिकारियों का कहना होता है कि शिकायत आने पर कार्रवाई की जाती है।





