
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से मिडिल ईस्ट में तनावपूर्ण हालात हैं। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य बंद हो गया है, जो कि तेल आयात के लिए भारत के लिहाज से बेहद अहम है। ऐसे वक्त में भी भारत बांग्लादेश को 5 हजार टन डीजल भेज रहा है।
अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान की जंग भीषण होती जा रही है। इसकी वजह से ही पूरी दुनिया में कच्चे तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हो रही है। भारत में भी एलपीजी का संकट बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। इस बीच ही मंगलवार को भारत अपने पड़ोसी देश बांग्लादेश को पाइपलाइन के जरिए 5000 टन डीजल भेजेगा। इस जानकारी की पुष्टि बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन BPC के चेयरमैन मुहम्मद रेजानुर रहमान ने की है।
जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसी) के प्रवक्ता ने कहा, ‘‘हमें सोमवार दोपहर से असम के नुमालीगढ़ रिफाइनरी लि. (एनआरएल) से बांग्लादेश-भारत मैत्री पाइपलाइन के माध्यम से (उत्तर-पश्चिमी) दिनाजपुर स्थित डिपो में डीजल मिलना शुरू हो गया है।’’ उन्होंने बताया कि 5,000 टन डीजल आने में लगभग 45 घंटे लग सकते हैं, यानी यह प्रक्रिया बुधवार शाम तक जारी रह सकती है।
बांग्लादेश बढ़ा रहा ईंधन भंडारण
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि बांग्लादेश ने कहा था कि भारत एक दीर्घकालिक समझौते के तहत और 1,80,000 टन की वार्षिक आपूर्ति व्यवस्था के हिस्से के रूप में 5,000 टन डीजल भेजेगा। इससे पहले भारतीय उच्चायुक्त प्रणय कुमार वर्मा ने कहा था कि भारत, बांग्लादेश के अतिरिक्त डीजल के अनुरोध पर सक्रिय रूप से विचार कर रहा है।
बांग्लादेश ऊर्जा आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच अपने ईंधन भंडार को बढ़ाना चाहता है। इसको लेकर जब भारतीय उच्चायुक्त से पूछा गया तो उन्होंने ढाका के अतिरिक्त डीजल आपूर्ति के अनुरोध को लेकर कहा, ‘‘बांग्लादेश, भारत का बहुत अच्छा मित्र है और हम उसकी प्रगति के लिए हरसंभव सहायता प्रदान करना चाहते हैं।’’
बांग्लादेश को डीजल क्यों भेज रहा भारत?
ढाका को डीजल आपूर्ति प्रदान करने के पीछे एक अहम यह है क्योंकि भारत और बांग्लादेश के बीच एक दीर्घकालिक ऊर्जा व्यापार समझौता है। इस समझौते के तहत भारत हर साल 1.8 लाख (1,80,000) टन डीजल की आपूर्ति पाइपलाइन के जरिए करता है। ये 5 हजार टन डीजल की आपूर्ति उसी वार्षिक कोटे का हिस्सा है।
बांग्लादेश में गहराया ईंधन संकट
रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में मिडिल ईस्ट में इजरायल-ईरान युद्ध के चलते तनाव के हालात हैं। इसके चलते ही वैश्विक तेल आपूर्ति बाधित हुई है। बांग्लादेश अपनी जरूरत का लगभग 95% ईंधन आयात करता है, जिससे वहां पेट्रोल और डीजल की भारी कमी हो गई है। स्थिति इतनी गंभीर है कि वहां ईंधन की राशनिंग (सीमित बिक्री) शुरू कर दी गई है और जमाखोरी रोकने के लिए छापेमारी की जा रही है।
भारत-बांग्लादेश ‘फ्रेंडशिप पाइपलाइन’ का उपयोग
यह डीजल भारत-बांग्लादेश फ्रेंडशिप पाइपलाइन (IBFP) के माध्यम से भेजा जा रहा है। यह पाइपलाइन असम के नुमालीगढ़ रिफाइनरी से पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी होते हुए बांग्लादेश के दिनाजपुर (पारबतीपुर डिपो) तक जाती है। पहले डीजल रेल के जरिए भेजा जाता था, लेकिन 131 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन से परिवहन का समय और लागत दोनों कम हो जाते हैं।





