1- SPG (स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप): यह देश का सबसे उच्च स्तरीय सुरक्षा घेरा है, जो केवल भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री को दिया जाता है. इसमें विशेष रूप से प्रशिक्षित एलीट कमांडो तैनात रहते हैं. इनके पास आधुनिक बुलेटप्रूफ गाड़ियां, ऑटोमैटिक हथियार, पायलट वाहन, और 24 घंटे सुरक्षा का व्यापक ढांचा होता है.2- Z+ (जेड प्लस) श्रेणी: यह देश की दूसरी सबसे मजबूत सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें लगभग 55 सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं. इसमें 10 से अधिक NSG या ITBP/CRPF के विशेष कमांडो शामिल होते हैं. सुविधाओं में 24 घंटे की एस्कॉर्ट टीम, कम से कम एक बुलेटप्रूफ गाड़ी, और आगे-पीछे सुरक्षा काफिला शामिल होता है. 3- Z (जेड) श्रेणी: इस सुरक्षा चक्र में 22 सुरक्षाकर्मी तैनात किए जाते हैं. इसमें 4 से 6 सशस्त्र कमांडो के अलावा पुलिस जवान और पीएसओ (पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर) शामिल होते हैं. इसके साथ सुरक्षा काफिले में एस्कॉर्ट वाहन और आवश्यकतानुसार बुलेटप्रूफ गाड़ी की सुविधा प्रदान की जाती है. 4- Y+ (वाई प्लस) श्रेणी: इसमें कुल 11 सुरक्षाकर्मियों का सुरक्षा घेरा होता है. इसमें 2 से 4 विशेष कमांडो और 2 से 3 पीएसओ शिफ्ट के आधार पर चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं. इसके तहत यात्रा के समय सुरक्षा वाहन की सुविधा भी मिलती है. 5- Y (वाई) श्रेणी: इस श्रेणी में 8 सुरक्षाकर्मी शामिल होते हैं, जिनमें 1 से 2 कमांडो और 2 व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी (PSO) तैनात किए जाते हैं. इसमें मुख्य रूप से आवास और व्यक्तिगत सुरक्षा अधिकारी की सुविधा मिलती है. 6- X (एक्स) श्रेणी: यह बुनियादी सुरक्षा स्तर है. इसमें कोई कमांडो नहीं होता, बल्कि 2 से 5 सशस्त्र पुलिसकर्मी तैनात रहते हैं. इनमें मुख्य रूप से 1 या 2 पीएसओ (PSO) शामिल होते हैं जो रोटेशन में 24 घंटे व्यक्तिगत सुरक्षा संभालते हैं.
भारत में केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा प्रदान करने की मूल श्रेणियां (X, Y, Y+, Z, Z+) एक समान ही होती हैं, लेकिन राज्य सरकारों द्वारा सुरक्षा देने के मानक और प्रक्रिया में कुछ विशिष्ट अंतर होते हैं:
1- सुरक्षा का मानक और खतरे का आकलन: राज्य सरकारों द्वारा दी जाने वाली सुरक्षा का प्राथमिक मानक 'थ्रेट परसेप्शन' यानी व्यक्ति को स्थानीय स्तर पर कितना खतरा है, उस पर आधारित होता है. राज्य में खुफिया एजेंसियां (जैसे स्टेट इंटेलिजेंस विंग/CID) यह आकलन करती हैं कि किसी व्यक्ति की जान या सुरक्षा को कितना जोखिम है.2- स्थानीय पुलिस बल की तैनाती: केंद्रीय सुरक्षा कवर (जैसे CRPF, ITBP या CISF) के विपरीत राज्य सरकार की सुरक्षा में मुख्य रूप से राज्य पुलिस बल और उनके विशेष बलों के जवानों व पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर्स (PSO) को ही तैनात किया जाता है. 3- समीक्षा समिति (State Security Committee): राज्य स्तर पर गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक (DGP) और खुफिया विभाग के प्रमुखों की एक समिति होती है, जो समय-समय पर वीआईपी सुरक्षा समीक्षा बैठक करती है. यदि किसी इलाके में खतरा कम हो जाता है (जैसे नक्सली या आपराधिक प्रभाव में कमी आना), तो सुरक्षा घटा दी जाती है या पूरी तरह हटा ली जाती है. वहीं आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा बढ़ाई भी जा सकती है. 4- अधिकार क्षेत्र (Jurisdiction): राज्य सरकार द्वारा दी गई सुरक्षा मुख्य रूप से उसी राज्य की सीमा के भीतर मान्य होती है. यदि वीआईपी किसी अन्य राज्य में जाता है, तो संबंधित राज्य की पुलिस से अतिरिक्त समन्वय की आवश्यकता होती है. 5- स्थानीय पद एवं आवश्यकता आधारित सुरक्षा: राज्य सरकार केवल मंत्रियों या विधायकों को ही नहीं, बल्कि संवेदनशील क्षेत्रों के स्थानीय नेताओं, सरपंचों, पंचायत प्रतिनिधियों और गवाहों को भी स्थिति की गंभीरता के आधार पर सुरक्षा प्रदान करती है.