धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल वन परिक्षेत्र का मामला, सरकारी खजाने पर सवाल: 53 लाख के तालाब का ठेका 10 लाख में...पढ़िए पूरी खबर....

क्रांतिकारी न्यूज़

सरकारी खजाने पर सवाल: 53 लाख के तालाब का ठेका 10 लाख में कैसे?

धरमजयगढ़ :- छत्तीसगढ़ का वन विभाग अक्सर अपने अनोखे कारनामों के लिए सुर्खियों में रहता है लेकिन इस बार धरमजयगढ़ वनमंडल के छाल वन परिक्षेत्र से जो मामला सामने आया है उसने विभाग के पूरे गणित पर ही सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मुख्य कार्यपालन अधिकारी कैम्पा छत्तीसगढ़ अटल नगर रायपुर के पत्र क्रमांक कैम्पा/05/एस ओ 2025-26/1535 और स्टीयरिंग कमेटी की बैठक में पास हुए करोड़ों के बजट में से एक ऐसा अजूबा निकलकर सामने आया है जिसे सुनकर आम आदमी तो क्या बड़े बड़े इंजीनियर भी अपना सिर पकड़ लें। ​मामला कैम्पा मद से स्वीकृत 53.29 लाख रुपये की भारी भरकम राशि से बनने वाले मिट्टी के तालाबों मृदा एवं जल संरक्षण सतही तालाब से जुड़ा है। लेकिन चौंकिए मत खेल बजट मिलने के बाद शुरू हुआ है ​कागजों पर 53 लाख और ठेका मिला सिर्फ 10 लाख में:-​विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एस ई सी एल छाल एस एम सी परिक्षेत्र में प्रथम वर्ष के कार्यों के लिए किश्तों में राशि स्वीकृत की गई थी जो क्रमश 12.29, 10.21, 9.68, 10.18 और 10.92 लाख रुपये थी। इन सबको मिलाकर कुल 53.29 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ और धरमजयगढ़ वनमंडल अधिकारी ने पत्र क्रमांक 14 दिनांक 22 जनवरी के जरिए इसे तकनीकी स्वीकृति भी दे दी।​नियमों के मुताबिक इस राशि से 20 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 3 मीटर गहरा तालाब निर्माण कार्य कराया जाना था। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की। अब यहाँ एंट्री होती है जादुई आंकड़ों' की ​L-1 न्यूनतम बोली उदय गुप्ता नामक ठेकेदार ने इस पूरे काम को महज 10,68,391 रुपये (दस लाख अड़सठ हजार तीन सौ इंक्यानबे रुपये) में करने का टेंडर डाल दिया और काम अपने नाम कर लिया। ​L-7 अधिकतम बोली वहीं साहिल इंटरप्राइजेस ने इसके लिए 15,46,355 रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। ​बड़ा सवाल जिस काम की सरकारी वैल्यू एस्टीमेट विभाग के आला अफसरों और इंजीनियरों ने 53.29 लाख रुपये तय की थी उसे कोई ठेकेदार सिर्फ 10 लाख रुपये में कैसे पूरा कर सकता है क्या विभाग का एस्टीमेट पूरी तरह फर्जी था या फिर ठेकेदार के पास कोई अलादीन का चिराग है।

​कागजों पर 53 लाख और ठेका मिला सिर्फ 10 लाख में :-​

विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एस ई सी एल छाल एस एम सी परिक्षेत्र में प्रथम वर्ष के कार्यों के लिए किश्तों में राशि स्वीकृत की गई थी जो क्रमश 12.29, 10.21, 9.68, 10.18 और 10.92 लाख रुपये थी। इन सबको मिलाकर कुल 53.29 लाख रुपये का एस्टीमेट तैयार हुआ और धरमजयगढ़ वनमंडल अधिकारी ने पत्र क्रमांक 14 दिनांक 22 जनवरी के जरिए इसे तकनीकी स्वीकृति भी दे दी।​नियमों के मुताबिक इस राशि से 20 मीटर लंबा, 20 मीटर चौड़ा और 3 मीटर गहरा तालाब निर्माण कार्य कराया जाना था। इसके लिए विभाग ने टेंडर प्रक्रिया शुरू की। अब यहाँ एंट्री होती है जादुई आंकड़ों' की ​L-1 न्यूनतम बोली उदय गुप्ता नामक ठेकेदार ने इस पूरे काम को महज 10,68,391 रुपये दस लाख अड़सठ हजार तीन सौ नब्बे रुपये में करने का टेंडर डाल दिया और काम अपने नाम कर लिया। ​L-7 अधिकतम बोली वहीं साहिल इंटरप्राइजेस ने इसके लिए 15,46,355 रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। ​बड़ा सवाल जिस काम की सरकारी वैल्यू एस्टीमेट विभाग के आला अफसरों और इंजीनियरों ने 53.29 लाख रुपये तय की थी उसे कोई ठेकेदार सिर्फ 10 लाख रुपये में कैसे पूरा कर सकता है क्या विभाग का एस्टीमेट पूरी तरह फर्जी था या फिर ठेकेदार के पास कोई अलादीन का चिराग है।

बड़ा सवाल -​ गुणवत्ता बचेगी या सिर्फ कागजों पर खुदेगा तालाब

​इस पूरे मामले ने छाल वन परिक्षेत्र में सुगबुगाहट तेज कर दी है। क्षेत्र के जानकार और ग्रामीण अब विभाग की मंशा पर सवाल उठा रहे हैं: ​मापदंडों का मखौल:- क्या महज 10 लाख रुपये में 20x20x3 मीटर का तालाब और उससे जुड़े मृदा संरक्षण के कार्य वन विभाग के कड़े मापदंडों के तहत पूरे हो पाएंगे ​बाकी के 43 लाख कहाँ जाएंगे अगर 10 लाख में काम हो रहा है तो स्वीकृत 53.29 लाख में से बची हुई करीब 43 लाख रुपये की भारी भरकम राशि का क्या होगा क्या यह राशि विभाग और ठेकेदार की आपसी सेटिंग की भेंट चढ़ जाएगी जब सरकारी खजाने को इस तरह टेंडर के नाम पर सस्ता दिखाया जा रहा है तो धरमजयगढ़ वनमंडल के जिम्मेदार अधिकारी इस पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं।
​भ्रष्टाचार की बू या कोई अदृश्य खेल :-​
जानकारों का कहना है कि यह या तो सरकारी पैसे को ठिकाने लगाने का कोई नया तरीका है या फिर काम की क्वालिटी से भयंकर समझौता होने वाला है। अमूमन टेंडर सरकारी रेट से 10 , 20% कम पर छूटते हैं लेकिन यहाँ तो सीधे 80% की गिरावट देखी जा रही है! ​अब देखना यह होगा कि इस अजीबोगरीब कारनामे' पर वन विभाग के उच्च अधिकारी और कैम्पा के जिम्मेदार अफसर संज्ञान लेते हैं या फिर हमेशा की तरह इस तालाब के पानी में भी भ्रष्टाचार का सच डूब जाएगा।    

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