झीरम घाटी हमले की चार्जशीट में बड़ा खुलासा......हमले को लेकर NIA की विशेष अदालत के हालिया फैसले में दर्ज गवाहियों और जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां ....
छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बहुचर्चित झीरम घाटी (Jhiram Ghati Attack) हमले को लेकर NIA की विशेष अदालत के हालिया फैसले में दर्ज गवाहियों और जांच से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। 25 मई 2013 को हुए इस हमले में कांग्रेस (Congress) के कई वरिष्ठ नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी। अदालत (court) ने सितंबर 2026 में मामले में 10 माओवादी आरोपियों को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई है। फैसले में हमले की साजिश, घटनास्थल की रेकी और माओवादियों की तैयारियों के साथ तत्कालीन कांग्रेस विधायक (Congress MLA) कवासी लखमा से जुड़ी गवाहियों का भी उल्लेख है। हालांकि, इन गवाहियों में लगाए गए आरोपों को अदालत का निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
हमले से पहले की गई थी इलाके की रेकी
अदालत के आदेश में दर्ज जांच के मुताबिक माओवादियों ने हमले की योजना पहले से तैयार की थी। सुकमा-जगदलपुर मार्ग का जायजा लेने के बाद झीरम घाटी में हमले के लिए जगह चुने जाने की बात सामने आई है। फैसले में माओवादी गतिविधियों, बैठकों और हमले से पहले की तैयारियों का भी उल्लेख है। कुछ रिपोर्टों में जांच के हवाले से यह भी बताया गया है कि हमले की तैयारी करीब तीन महीने पहले से शुरू होने का दावा किया गया था और जंगल में कैंप बनाकर रसद जुटाई गई थी।
कवासी लखमा को लेकर क्या कहा गया?
फैसले में दर्ज एक अभियोजन गवाह की गवाही के मुताबिक, कवासी लखमा नंद कुमार पटेल के वाहन में सवार थे। गवाह ने दावा किया कि रास्ते में लखमा के पास लगातार फोन आ रहे थे और वह गोंडी भाषा में बातचीत कर रहे थे। गवाही में करीब 10-15 फोन कॉल का जिक्र किया गया है। गवाह के अनुसार, लखमा पहले केशलूर जाने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन नंद कुमार पटेल के कहने पर वह उनके साथ गए। हमले के दौरान लखमा और माओवादी नेता विनोद के बीच गोंडी में बातचीत होने का दावा भी गवाही में किया गया है।
नंद कुमार पटेल और दिनेश पटेल की हत्या
गवाही के मुताबिक, हमले के दौरान माओवादियों ने नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, कवासी लखमा और वाहन चालक को एक तरफ ले जाया था। बाद में पटेल और उनके बेटे को बांधकर गोली मार दी गई, जबकि लखमा और चालक को वहां से जाने दिया गया। इसके बाद दोनों मोटरसाइकिल से दरभा थाने पहुंचे।
क्या है पूरी घटना?
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा का काफिला सुकमा से जगदलपुर लौट रहा था। झीरम घाटी में पहुंचते ही माओवादियों ने पहले विस्फोट किया और फिर काफिले पर भारी गोलीबारी शुरू कर दी। इस हमले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, महेंद्र कर्मा और कई अन्य नेताओं समेत 27 लोगों की मौत हुई थी।