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रायगढ़। भारतीय आदिम जाति सेवक संघ द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का गठन किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के बाद पहली बार संगठन ने राज्य स्तर पर व्यापक विस्तार करते हुए 22 गणमान्य व्यक्तियों को राज्य बोर्ड में शामिल किया है। नवगठित बोर्ड के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा को सौंपी गई है।
जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार राज्य बोर्ड में वरिष्ठ समाजसेवी एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं को विभिन्न दायित्व दिए गए हैं। बोर्ड में अध्यक्ष के अलावा वरिष्ठ उपाध्यक्ष के रूप में भोली ठाकुर, उपाध्यक्ष के रूप में कुमार मंडावी, कोषाध्यक्ष के रूप में तुलसी कोरचे, प्रशासनिक सचिव के रूप में आर. चुरूज, संगठन सचिव के रूप में सुरेंद्र साहू तथा सदस्य के रूप में कई सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है। इसके अलावा विशेष आमंत्रित सदस्यों की भी नियुक्ति की गई है।
संस्था द्वारा बताया गया कि भारतीय आदिम जाति सेवक संघ की स्थापना ठक्कर बापा द्वारा 24 अक्टूबर 1948 को अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितों के संरक्षण और विकास के उद्देश्य से की गई थी। यह संस्था लंबे समय से देशभर में आदिवासी समाज के उत्थान, शिक्षा, सामाजिक न्याय और अधिकारों के लिए कार्य करती आ रही है।
प्रेस विज्ञप्ति में उल्लेख किया गया है कि संस्था से देश के कई प्रतिष्ठित व्यक्तित्व जुड़े रहे हैं। भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद इस संस्था के प्रथम अध्यक्ष रहे, जबकि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संस्था से जुड़े थे। इसके अलावा पूर्व प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई को संस्था द्वारा “भारत रत्न” सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। वहीं पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह, पूर्व केंद्रीय मंत्री अर्जुन सिंह, नानाजी देशमुख सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों का भी संस्था से जुड़ाव रहा है।
संस्था के राष्ट्रीय महासचिव अजय कुमार चौबे एवं सचिव राजेश मालवीय ने वर्ष 2024 में नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रमों सहित कई राष्ट्रीय आयोजनों में सक्रिय भूमिका निभाई। हाल ही में मार्च 2026 में आयोजित राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति की बैठक में सर्वसम्मति से छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड गठन का निर्णय लिया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव अजय कुमार चौबे के प्रस्ताव एवं राष्ट्रीय अध्यक्ष जय राम शाह की सहमति से कुंवर जितेंद्र नरसिंह राणा को छत्तीसगढ़ राज्य बोर्ड का अध्यक्ष मनोनीत किया गया।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि नवगठित बोर्ड छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के अधिकार, शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, विकास और जनजागरूकता के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेगा। संगठन ने राज्य में सामाजिक समरसता और आदिवासी हितों को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी जताई है।