जमीन गई, रोजगार नहीं मिला
नेगी ने आरोप लगाया कि औद्योगिक एवं खनन परियोजनाओं के लिए किसानों और आदिवासी परिवारों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन प्रभावित परिवारों के योग्य युवाओं को अपेक्षित स्थायी रोजगार नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बड़े उद्योगों को लाभ पहुंचा रहा है, जबकि स्थानीय युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश वापस नहीं लिया तो कांग्रेस ग्रामीणों, किसानों और प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से बड़ा जन आंदोलन करेगी।
स्थानीय युवाओं के रोजगार का हिसाब मांगा
कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय रोजगार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिले में बड़े पैमाने पर खदानें और पावर प्लांट संचालित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा है। प्रशासन और कंपनियों को सार्वजनिक करना चाहिए कि इन परियोजनाओं में कितने स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिला है। डनसेना ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को मुख्य रूप से ठेका और अस्थायी रोजगार तक सीमित रखा जा रहा है, जबकि महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी लोगों को प्राथमिकता मिल रही है।
डीएमएफ फंड पर श्वेत पत्र की मांग
खनन प्रभावित क्षेत्रों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि के उपयोग पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने कहा कि खनन से प्राप्त राशि का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और आधारभूत सुविधाओं का विकास है। इसके बावजूद कई प्रभावित गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से डीएमएफ में प्राप्त राशि, उसके आवंटन और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
भारी वाहनों से सड़कें खराब, प्रदूषण बढ़ने का आरोप
तमनार, घरघोड़ा और छाल पुसौर , खरसिया और धरमजयगढ़ क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही से खराब हुई ग्रामीण सड़कों और प्रदूषण का मुद्दा भी कांग्रेस ने उठाया। नेगी ने कहा कि भारी एवं ओवरलोडेड वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कें जर्जर हो रही हैं। धूल और प्रदूषण के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की सड़कों का तत्काल गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग की।
जमीन गई, रोजगार नहीं मिला
नेगी ने आरोप लगाया कि औद्योगिक एवं खनन परियोजनाओं के लिए किसानों और आदिवासी परिवारों की जमीनें अधिग्रहित की गईं, लेकिन प्रभावित परिवारों के योग्य युवाओं को अपेक्षित स्थायी रोजगार नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जिले के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन बड़े उद्योगों को लाभ पहुंचा रहा है, जबकि स्थानीय युवा रोजगार के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जनता की समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है। यदि प्रशासन ने प्रतिबंधात्मक आदेश वापस नहीं लिया तो कांग्रेस ग्रामीणों, किसानों और प्रभावित परिवारों के साथ मिलकर चरणबद्ध तरीके से बड़ा जन आंदोलन करेगी।
स्थानीय युवाओं के रोजगार का हिसाब मांगा
कांग्रेस प्रवक्ता तारेन्द्र डनसेना ने औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय रोजगार को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जिले में बड़े पैमाने पर खदानें और पावर प्लांट संचालित होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को पर्याप्त स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा है। प्रशासन और कंपनियों को सार्वजनिक करना चाहिए कि इन परियोजनाओं में कितने स्थानीय युवाओं को स्थायी रोजगार मिला है। डनसेना ने आरोप लगाया कि स्थानीय युवाओं को मुख्य रूप से ठेका और अस्थायी रोजगार तक सीमित रखा जा रहा है, जबकि महत्वपूर्ण पदों पर बाहरी लोगों को प्राथमिकता मिल रही है।
डीएमएफ फंड पर श्वेत पत्र की मांग
खनन प्रभावित क्षेत्रों में डीएमएफ (जिला खनिज संस्थान न्यास) की राशि के उपयोग पर भी कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष नगेंद्र नेगी ने कहा कि खनन से प्राप्त राशि का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क और आधारभूत सुविधाओं का विकास है। इसके बावजूद कई प्रभावित गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सरकार से डीएमएफ में प्राप्त राशि, उसके आवंटन और खर्च का पूरा विवरण सार्वजनिक करने तथा श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।
भारी वाहनों से सड़कें खराब, प्रदूषण बढ़ने का आरोप
तमनार, घरघोड़ा और छाल पुसौर , खरसिया और धरमजयगढ़ क्षेत्र में भारी वाहनों की आवाजाही से खराब हुई ग्रामीण सड़कों और प्रदूषण का मुद्दा भी कांग्रेस ने उठाया। नेगी ने कहा कि भारी एवं ओवरलोडेड वाहनों की लगातार आवाजाही से सड़कें जर्जर हो रही हैं। धूल और प्रदूषण के कारण ग्रामीणों को परेशानी हो रही है। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों की सड़कों का तत्काल गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण कराने की मांग की।