
3,38,509 रुपए बिल के एवज में 1,70,236 रुपए का ही किया भुगतान
क्रांतिकारी संकेत
रायगढ़। जिला उपभोक्ता फोरम ने बीमित व्यक्ति के इलाज का पूरा खर्च भुगतान नहीं करने पर स्वास्थ्य बीमा कंपनी स्टार हेल्थ एण्ड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी को सेवा का दोषी माना है और शेष रकम 1 लाख 68 हजार सहित मानसिक क्षति के रूप में 10 हजार तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रूप देने का आदेश दिया है।
न्यायालयीन सूत्रों के मुताबिक खरसिया निवासी अंकित कुमार बंसल आत्मज कैलाश ने बीमा कंपनी स्टार हेल्थ एण्ड एलाइड इंश्योरेंस कंपनी से स्वास्थ्य बीमा की पालिसी ली थी, जो 5,00,000 रुपए तक का था। कोविड-19 के दौरान उन्हें भी कोरोना हो गया था। उनका इलाज प्रकाश हास्पिटल एवं रिसर्च सेंटर राउरकेला उडि़सा में हुआ है। आवेदक द्वारा चिकित्सा के सम्बंध में बिल 3,38,509 रुपए का प्रस्तुत किया है जिसमें से बीमा कंपनी ने 1,70,236 रुपए का भुगतान किया गया है। शेष राशि 1,68,272/- का भुगतान करने से मना कर दिया गया। इलाज में खर्च शेष राशि का भुगतान नहीं करने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। इस पर आयोग के अध्यक्ष छमेश्वर पटेल, सदस्यद्वय राजेंद्र पांडेय व श्रीमती राजश्री अग्रवाल ने सुनवाई की।
आयोग ने माना कि कोविड-19 एक विशेष प्रकार की महामारी रही है जिसके सम्बंध में अत्यंत सावधानीपूर्वक व्यवहार किया जना रहता रहा तथा उक्त सम्बंध में शासन के द्वारा विभिन्न गाईड लाईन जारी किये गये जिसमें मास्क का उपयोग, आईसोलेशन एवं सेनेटाईजर तथा हेण्डवॉश का उपयोग करना आवश्यक रहा है। अनावेदक द्वारा उक्त तथ्यों की जानकारी रहते हुए भी चिकित्सकीय व्यय में कटौत्ती किया जाना निश्चित रूप से हम लोगों की राय में तथा मानवीय दृष्टिकोण से सेवा में कमी है। अतएव अनावेदक द्वारा सेवा में कमी किया जाना प्रमाणित पाया जाता है। इसलिए बीमा कंपनी द्वारा शेष राशि 1,68.272 रुपए अदा न करना व्यवसायिक कदाचरण है। जिसके कारण आवेदक को मानसिक परेशानी एवं अनावश्यक वाद व्यय वहन करना पड़ा है।
आयोग ने जहाँ तक मानसिक परेशानी का प्रश्न है उसका मूल्यांकन रूपये में किया जाना सम्भव नहीं है तथापि हम लोगो के अनुसार मानसिक क्षति के मद 10,000 रुपए तथा वाद व्यय 5,000 रुपए नियत किया जाना उचित पाया जाता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने बीमा कंपनी को शेष रकम 1 लाख 68 हजार सहित मानसिक क्षति के रूप में 10 हजार तथा वाद व्यय के रूप में 5 हजार रूपए 45 दिन के अंदर देने का आदेश दिया है। उक्त समय में राशि का भुगतान नहीं करने पर 6 प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज लगेगा।





