सुशासन तिहार में महिला सशक्तिकरण की मिसाल, ‘मोर गांव मोर पानी’ अभियान से आजीविका और जल संरक्षण को मिला नया आधार

कुंजेमुरा शिविर में गायत्री मां स्व-सहायता समूह को सौंपी गई आजीविका डबरी, महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास रायगढ़ जिले में 400 से अधिक आजीविका डबरियों और 23 नए तालाबों के निर्माण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिल रही मजबूती रायगढ़। रायगढ़ जिले में जल संरक्षण, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने की दिशा में प्रशासन लगातार नवाचारपूर्ण पहल कर रहा है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुसार संचालित “सुशासन तिहार” और “मोर गांव मोर पानी” अभियान अब ग्रामीण क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव की नई तस्वीर प्रस्तुत कर रहे हैं। इसी कड़ी में मंगलवार को जनपद पंचायत तमनार अंतर्गत ग्राम कुंजेमुरा में आयोजित सुशासन तिहार शिविर में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गायत्री मां स्व-सहायता समूह की सदस्य को आजीविका डबरी का हस्तांतरण प्रमाण-पत्र प्रदान किया गया। शिविर में ग्राम पंचायत सराईटोला निवासी श्रीमती सनमेत अगरिया, पति श्री बुधराम अगरिया को नवनिर्मित आजीविका डबरी का प्रबंधन एवं स्वामित्व औपचारिक रूप से सौंपा गया। श्रीमती अगरिया गायत्री मां स्व-सहायता समूह की सक्रिय सदस्य हैं। सुशासन तिहार के जन समस्या निवारण शिविर में प्रदेश के पूर्व मंत्री श्री सत्यानंद राठिया, जनपद अध्यक्ष जागेश सिदार, अश्वनी कुमार पटनायक, जिला पंचायत सदस्य बंशीधर चौधरी, रमेश बेहरा, विनायक पटनायक, सतीश बेहरा, सरोज बेहरा, एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने यह प्रमाण पत्र  प्रदान किया। प्रशासन का मानना है कि आजीविका डबरियां ग्रामीण परिवारों के लिए बहुआयामी आय का माध्यम बन रही हैं। इन डबरियों के माध्यम से मत्स्य पालन, उद्यानिकी, साग-सब्जी उत्पादन तथा जलीय फलों की खेती जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीण महिलाओं और उनके परिवारों की आय में स्थायी वृद्धि संभव हो सकेगी। रायगढ़ जिले में “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत जल संरक्षण एवं संवर्धन को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। मनरेगा योजना के माध्यम से जिले में वर्तमान में 400 से अधिक आजीविका डबरियों का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिन्हें मई माह के अंत तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा “नवा तरिया आय का जरिया” परियोजना के अंतर्गत जिले में 23 नए तालाबों का निर्माण भी किया जा रहा है। इन तालाबों को विशेष रूप से सीएलएफ महिला समूहों की आजीविका गतिविधियों को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है। इन जल संरचनाओं में मछली पालन, दोहरी फसल, साग-सब्जी उत्पादन और जलीय फलों की खेती जैसी गतिविधियां संचालित की जाएंगी, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। जिले में पिछले दो वर्षों से संचालित “जल संकल्प” अभियान के माध्यम से जल संचय, संरक्षण और संवर्धन को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है। जिला पंचायत सीईओ श्री अभिजीत बबन पठारे ने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन का वास्तविक उद्देश्य है। आजीविका डबरी का हस्तांतरण केवल एक योजना का लाभ नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मान से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। प्रशासन को विश्वास है कि श्रीमती सनमेत अगरिया और उनका समूह इस पहल के माध्यम से स्वावलंबन की नई मिसाल स्थापित करेंगे। कुंजेमुरा में आयोजित शिविर में ग्रामीणों ने शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा जल संरक्षण और आजीविका आधारित गतिविधियों को लेकर उत्साह भी दिखाई भी दिए।

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